Monday, May 6, 2019

मोदी का मायावती-अखिलेश-राहुल पर निशाना

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भदोही लोकसभा में चुनाव प्रचार करने के दौरान मायावती और अखिलेश यादव के गठबंधन को महामिलावटी बताया है. उन्होंने कहा कि मौक़ापरस्त लोगों ने अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए महामिलावटी गठबंधन बनाया है.
मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के पूर्व बिजनेस पार्टनर का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों को केवल दलाली और लाइजनिंग का अनुभव रहा है.
लोकसभा का चुनाव अपने पांचवे चरण पर पहुंच चुका है. 6 मई को देश के सात राज्यों की 51 सीटों पर चुनाव होने हैं.
उत्तर प्रदेश में 14 सीटों, राजस्थान में 12 सीटों, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में सात-सात सीटों पर चुनाव होंगे, बिहार में पांच और झारखंड में चार सीटों के लिए चुनाव होना है. जम्मू-कश्मीर के लद्दाख सीट और अनंतनाग सीट के लिए पुलवामा और शोपियां जिलों में चुनाव होना है.
इन सीटों पर 674 उम्मीदवार खड़े हुए हैं. जिसका फैसला 23 मई को सामने आयेगा.
वेनेज़ुएला में विपक्ष के नेता ख़्वान ग्वाइदो ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वो देश में व्याप्त सियासी गतिरोध को ख़त्म करने के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसके लिए ग्वाइदो ने अमरीका से सैन्य मदद लेने की संभावना को भी ख़ारिज नहीं किया. उन्होंने कहा कि इस समय वेनेज़ुएला में सिर्फ़ रूस और क्यूबा का दख़ल है और दोनों मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो कीसहायता कर रहे हैं.
वहीं रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमरीका को वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन कराने के लिए 'ग़ैर ज़िम्मेदाराना योजनाएं' छोड़कर अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में रहने को कहा है.
पश्चिम बंगाल में पांचवें दौर में सोमवार को जिन सात सीटों पर मतदान हो रहा है वह सभी सीटें पिछली बार तृणमूल कांग्रेस ने जीती थी.
इनमें हावड़ा ज़िले की दो सीटों के अलावा हुगली ज़िले की तीन और बांग्लादेश से सटे उत्तर 24-परगना ज़िले की दो सीटें शामिल हैं.
बीजेपी को उम्मीद है कि ख़ासकर बांग्लादेश से सटे इलाक़ों में नागरिकता (संशोधन) विधेयक और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिंटीजंस यानी एनआरसी जैसे मुद्दे उसके सिर पर जीत का सेहरा बांध देंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक अपनी रैलियों में इन दोनों मुद्दों पर ज़ोर देते रहे हैं. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इन सीटों पर अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है.
इस दौर में उत्तर 24-परगना ज़िले में बांग्लादेश सीमा से सटी बनगांव सीट सबसे अहम है.
इस सीट पर मतुआ समुदाय के वोट ही निर्णायक हैं. पिछली बार उसके उम्मीदवार कपिल कृष्ण ठाकुर जीत गए थे.
इससे पहले वर्ष 2009 में भी यह सीट तृणमूल की ही झोली में गई थी. लेकिन बीते पांच वर्षों के दौरान भाजपा ने इस तबक़े के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है.
इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीती फ़रवरी में मतुआ समुदाय की कुलमाता कही जाने वाली वीणापाणि देवी से मुलाक़ात कर उनका आशीर्वाद लिया था. लेकिन हाल में वीणापाणि देवी के निधन के बाद इस समुदाय में मतभेद नज़र आ रहे हैं.
इस सीट के नतीजे ही बताएंगे कि भाजपा को मतुआ समुदाय में पैठ बनाने में कितनी कामयाबी मिली है.
तृणमूल कांग्रेस ने इस बार यहां ममता ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया है और बीजेपी ने शांतनु ठाकुर को मैदान में उतारा है. रिश्ते में यह दोनों चाची और भतीजे हैं.

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