Tuesday, September 4, 2018

कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब निकाय चुनाव में के साथ क्या हुआ?

लाश नाथ शुक्ल के मुताबिक गांववालों को लग रहा था कि वो अपनी बीमार गाय को छोड़ने जा रहे थे. हालांकि कैलाश ने भीड़ को सफाई दी कि वो गाय को छोड़ने नहीं, उसका इलाज़ करवाने जा रहे हैं. लेकिन भीड़ ने उनकी बात नहीं मानी. इसी बीच भीड़ में से किसी ने कह दिया कि कैलाश अपनी गाय को गांव के ही एक मुस्लिम को बेचने के लिए लेकर जा रहे हैं. इसके बाद तो भीड़ और भी उग्र हो गई और कैलाश की पिटाई शुरू कर दी. पिटाई से कैलाश का हाथ टूट गया है. डॉक्टरों ने उनके दाहिने हाथ पर प्लास्टर चढ़ा रखा है. वहीं कैलाश का आरोप है कि पिटाई के बाद जब वो देहात कोतवाली पहुंचे, तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया. जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसपी राजेश कुमार को दी गई, तो उनके आदेश पर केस दर्ज हो पाया. इसके बाद एसपी राजेश कुमार के आदेश पर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. इसके अलावा एसपी राजेश कुमार ने उन पुलिसवालों के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी है, जिन्होंने कैलाश शुक्ल का मुकदमा दर्ज करने से इन्कार कर दिया था.भले ही बलरामपुर पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्
शहरी निकाय के इन चुनावों में कुल 8340 उम्मीदवार मैदान में थे. इसमें कांग्रेस के 2306, भाजपा के 2203 और जेडी-एस के 1397 उम्मीदवार थे. वहीं शहर निगम चुनावों में 814 उम्मीदवार हैं. इसमें कांग्रेस के 135, भाजपा के 130 और जेडी-एस के 129 उम्मीदवार हैं.
तार कर लिया है, लेकिन ये भीड़ है. भीड़ बच्चा चोरी पर भी न्याय करने लगी है, भीड़ मोबाइल चोरी पर भी न्याय करने लगी है, भीड़ गोकशी पर भी न्याय करने लगी है. पहले ये भीड़ मुस्लिमों को निशाना बना रही थी, तो लोग उन्हें गोतस्कर करार दे रहे थे. भीड़ दलितों को निशाना बना रही थी, तो उन्हें भी गोतस्कर कह दिया जाता था, लेकिन अब जब इस भीड़ के हाथ में मुस्लिम नहीं आ रहा, दलित नहीं आ रहा तो ये भीड़ खाली बैठी है. उसे निशाना चाहिए ही चाहिए. और अब निशाना 70 साल के कैलाश नाथ शुक्ल बने हैं. अगर भीड़ ऐसे ही अराजक होती रही, तो अगला निशाना हम आप कोई भी हो सकते हैं और हमें आपको निशाने पर लेने के लिए भीड़ के पास कोई न कोई नया बहाना मिल ही जाएगा.मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया था. बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी थी. पर वो सरकार बनाते-बनाते रह गई. मिठाई एकदम मुंह में आते-आते रह गई. अब इसी कर्नाटक से फिर भारतीय जनता पार्टी के लिए बुरी खबर आई है. 31 अगस्त को कर्नाटक में 105 निकाय सीटों के 2664 वार्डों पर चुनाव हुए थे. 3 सितंबर को उसके रिजल्ट भी आ गए हैं. यहां भी बीजेपी पिछड़ गई है. कांग्रेस और जेडी-एस ने यहां भी बाजी मार ली है. हालांकि कांग्रेस और जेडी-एस अलग-अलग लड़े थे. अब तक 2664 वार्ड के नतीजे आए हैं. इसमें कांग्रेस ने 982, बीजेपी ने 929 और जेडी-एस ने 375 सीटों पर जीत दर्ज की है.
र्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने इस चुनाव में एक तरह से हार स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार की वजह से पार्टी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई. हालांकि वो ये जरूर बोले कि 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी बेहतर प्रदर्शन करेगी. येदियुरप्पा ने चुनाव से पहले 50 से 60 फीसदी सीटों पर बीजेपी की जीत का दावा किया था.
अलग-अलग चुनाव लड़े कांग्रेस और जेडीएस
कांग्रेस और जेडी-एस आए नतीजों से भी ज्यादा सीटें ला सकते थे, अगर दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ते. हालांकि अब माना जा रहा है कि चुनाव बाद दोनों पार्टियां लोकसभा चुनाव के लिए फिर साथ आ सकती हैं. पिछली बार 2013 में 4976 सीटों के लिए चुनाव हुए थे. तब कांग्रेस ने 1,960 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं, जेडीएस ने 905 और भाजपा ने भी 905 सीटों जीत हासिल की थी. हालांकि इस लिहाज से इस बार जेडी-एस का नुकसान हुआ है. सीएम एचडी कुमारस्वामी के लिए ये अच्छी खबर नहीं है.
कर्नाटक निकाय चुनावों से ही एक और खबर आ रही है. यहां पड़ने वाले तुमकुर में कांग्रेस उम्मीदवार के विजय जुलूस पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने तेजाब फेंक दिया. इसमें करीब 25 लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि अभी ये नहीं साफ हो सका है कि हमलावर कौन थे.

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